भारतीय संविधान की प्रस्तावना (Preamble)

भारतीय संविधान की प्रस्तावना (Preamble) एक संक्षिप्त परिचयात्मक उद्देशिका है, यह संविधान के मार्गदर्शक उद्देश्य और सिद्धांतों को निर्धारित करता है और यह उस स्रोत अर्थात भारतीय जनता को इंगित करता है जिससे भारतीय संविधान को शक्ति प्राप्त होती है, इसे 26 नवंबर 1949 को भारत की संविधान सभा द्वारा अपनाया गया और 26 जनवरी 1950 को लागू हुआ।

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भारतीय संविधान की प्रस्तावना
भारतीय संविधान की प्रस्तावना

IAS Exam के भारतीय राजनीति ( Indian Polity) के एक भाग के रूप में, यह एक महत्वपूर्ण टॉपिक है। इसलिए, यह लेख संविधान की प्रस्तावना के बारे में बात करेगा। आप उद्देश्य प्रस्ताव के बारे में भी पढ़ सकते हैं, जो कि संशोधित संस्करण में, प्रस्तावना में परिलक्षित है।

भारतीय संविधान की प्रस्तावना: उद्देश्य प्रस्ताव

1946 में, जवाहरलाल नेहरू द्वारा, संवैधानिक संरचना का वर्णन करते हुए उद्देश्य प्रस्ताव को प्रस्तावित किया गया था। 1947 (22 जनवरी) में इसे संविधान सभा द्वाराअपनाया गया । इसने भारत के संविधान को आकार दिया और इसका संशोधित संस्करण 1950 के उपरांत भारतीय संविधान की प्रस्तावना में परिलक्षित हुआ।

संघवाद | Federalism

उद्देश्य प्रस्ताव के मूल सिध्दांत

  • भारत एक पूर्ण संप्रभुता संपन्न गणराज्य होगा, जो स्वयं अपना संविधान बनाएगा।
  • भारतीय संघ तथा उसकी इकाइयों में समस्त राजशक्ति का मूल स्रोत स्वयं जनता होगी।
  • भारत संघ में ऐसे सभी क्षेत्र शामिल होंगे, जो इस समय ब्रिटिश भारत में हैं या देशी रियासतों में हैं या इन दोनों से बाहर, ऐसे क्षेत्र हैं, जो प्रभुतासंपन्न भारत संघ में शामिल होना चाहते हैं।
  • भारत के नागरिकों को सामाजिक, आर्थिक और राजनीतिक न्याय, पद, अवसर और कानूनों की समानता, विचार, भाषण, विश्वास, व्यवसाय, संघ निर्माण और कार्य की स्वतंत्रता, कानून तथा सार्वजनिक नैतिकता के अधीन प्राप्त होगी।
  • अल्पसंख्यक वर्ग, पिछड़ी जातियों और कबायली जातियों के हितों की रक्षा की समुचित व्यवस्था की जाएगी।

भारतीय संविधान के महत्वपूर्ण अनुच्छेद

भारतीय संविधान की प्रस्तावना : Facts for UPSC

क्या प्रस्तावना भारतीय संविधान का हिस्सा है?हां, यह भारतीय संविधान का एक हिस्सा है, जिये SC द्वारा केसवानंद भारती मामले में भी मान्य किया गया है।
भारत की प्रस्तावना किसने लिखी?भारत के संविधान की प्रस्तावना (Preamble), 13 दिसंबर, 1946 को संविधान सभा में जवाहरलाल नेहरू द्वारा पेश किये गए उद्देश्य प्रस्ताव (Objective Resolution) पर आधारित है।
भारतीय संविधान में कितने प्रस्तावना हैं?वर्तमान भारतीय संविधान में 22 भाग, 12 अनुसूचियों और 448 अनुच्छेदों के साथ केवल 1 प्रस्तावना मौजूद है।
भारत के प्रस्तावना में सबसे महत्वपूर्ण शब्द कौन से है?यद्यपि किसी विशेष शब्द को दूसरों की तुलना में अधिक महत्व नहीं दिया गया है, हालांकि, ‘हम, भारत के लोग’ ऐसे शब्द हैं, जिन्हें भारतीय संविधान की प्रस्तावना में सबसे शक्तिशाली कहा जाता है
हमें प्रस्तावना की आवश्यकता क्यों है?यह हमें मौलिक मूल्य प्रदान करता है और साथ यह संविधान का मुख्य आकर्षण है
किस मामले में, सर्वोच्च न्यायालय ने एक फैसला सुनाया कि प्रस्तावना भारतीय संविधान का हिस्सा नहीं है?बेरुबरी केस (1960 ) के मामले में, सुप्रीम कोर्ट ने यह कहा था कि प्रस्तावना, संविधान का हिस्सा नहीं है, बल्कि इसे संविधान के प्रावधानों के लिए मार्गदर्शक सिद्धांत माना जाना चाहिए।
sambidan ki prastawna

हमारे राष्ट्र के समक्ष लोगों की आशाओं और आकांक्षाओं के साथ-साथ आदर्शों को भी स्पष्ट शब्दों में प्रस्तावना में वर्णित किया गया है। इसे संविधान की आत्मा माना जा सकता है। प्रस्तावना को भूमिका के रूप में संदर्भित किया जा सकता है जो पूरे संविधान को उजागर करता है।

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भारतीय संविधान की प्रस्तावना के रोचक तथ्य

  • यह संपूर्ण संविधान के अधिनियमन के बाद लागू किया गया था।
  • धर्मनिरपेक्ष‘ शब्द को 1976 के 42 वें संवैधानिक संशोधन अधिनियम द्वारा भारतीय संविधान की प्रस्तावना में जोड़ा गया था।
  • हमारी उद्देशिका हमें यह स्वतंत्रता देती है कि हम अपने कृत्यों, अपनी आस्था, अपने विचारों इत्यादि के सम्बन्ध में उचित चुनाव कर सकते हैं।
  • प्रस्तावना में न्याय (सामाजिक, आर्थिक और राजनीतिक) के आदर्श सोवियत संघ (रूस) के संविधान से लिए गए हैं ।
  • गणतंत्र और स्वतंत्रता, समानता और बंधुत्व के आदर्शों को फ्रांसीसी संविधान से लिया गया है ।
  • विश्व इतिहास में सबसे पहली प्रस्तावना अमेरिका के संविधान में लिखी गयी थी।
भारतीय संविधान की प्रस्तावना
भारतीय संविधान की प्रस्तावना

संविधान का Article 32

भारतीय प्रस्तावना के चार मुख्य घटक

भारतीय संविधान का स्रोत‘हम, भारत के लोग’ भारत के लोगों को भारतीय संविधान का स्रोत बताया जाता है।
भारतीय राज्य की प्रकृतिभारत की प्रस्तावना भारत को संप्रभु, धर्मनिरपेक्ष, गणराज्य और लोकतांत्रिक राष्ट्र के रूप में प्रस्तुत करती है
भारतीय संविधान के उद्देश्यन्याय, स्वतंत्रता, समानता और बंधुत्व भारत के प्रस्तावना के उद्देश्यों के रूप में दर्शाये गए है
भारत के संविधान को अपनाने की तिथि26 नवंबर, 1949

भारतीय संविधान की प्रस्तावना में प्रमुख शब्दावली

  1. प्रभुत्व-संपन्न (Sovereign)
  2. समाजवादी (Socialist)
  3. धर्म निरपेक्ष (Secular)
  4. लोकतंत्रात्मक (Democratic)
  5. गणतंत्र (Republic)
  6. न्याय (Justice)
  7. स्वतंत्रता (Liberty)
  8. समानता (Equality)
  9. बन्धुत्व (Fraternity)

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