Mauryan : Art And Architecture NCERT नोट्स UPSC के लिए

परिचय

  • श्रमण परंपरा के धर्म, अर्थात्, जैन धर्म और बौद्ध धर्म ईसा पूर्व छठी शताब्दी के आसपास उभरे।
  • Mauryan ने चौथी शताब्दी ईसा पूर्व में खुद को एक महान शक्ति के रूप में स्थापित किया था और तीसरी शताब्दी तक, उनके नियंत्रण में भारत के बड़े हिस्से थे।
  • इस Mauryan काल में यक्षों और देवी-देवताओं की पूजा सहित धार्मिक प्रथाओं के कई तरीके थे। फिर भी, बौद्ध धर्म सबसे लोकप्रिय हो गया।
  • हड़प्पा सभ्यता (Harappan civilization) के बाद, स्मारकीय पत्थर की मूर्तिकला और वास्तुकला केवल मौर्य काल में दिखाई देती है।
  • स्तंभ, मूर्तियां, रॉक-कट वास्तुकला, स्तूप, विहार और चैत्य जैसी इमारतें, जिन्होंने कई उद्देश्यों को पूरा किया। वे सौंदर्य-गुणवत्ता में उत्कृष्ट हैं और उनके डिजाइन और निष्पादन में शानदार भी है।
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NCERT notes,  UPSC civil services exam की तैयारी के लिए महत्वपूर्ण स्रोत हैं। ये नोट्स अन्य प्रतियोगी परीक्षाओं जैसे bank PO, SSC, राज्य सिविल सेवा परीक्षा आदि के लिए भी उपयोगी होंगे।

Mauryan : Art And Architecture
Mauryan : Art And Architecture

Subhash Chandra Bose |नेताजी सुभाष चंद्र बोस (1897-1945)

मौर्य स्तंभ और मूर्तियां (Mauryan Pillars and Sculptures)

स्तंभ और मूर्तियां

  • आचमनी साम्राज्य (फारसी साम्राज्य) में भी स्तंभों का निर्माण आम था। पॉलिश किए गए पत्थरों के उपयोग, कमल जैसे रूपांकनों जैसी समानताएं थीं, जबकि कई विविधता भी हैं। जहा आचमनी स्तंभों का निर्माण टुकड़ों में किया गया था, वहा मौर्य साम्राज्य(Mauryan Empire) में चटानो को काट कर स्तंभों को बनाया गया था, जो कार्वर के बेहतर कौशल को प्रदर्शित करता था ।
  • भारतीय विद्वानों के अनुसार अशोक के स्तंभ की कला का स्रोत भारतीय है।
  • पूरे मौर्य साम्राज्य(Mauryan Empire) में पत्थर के स्तंभ देखे जा सकते हैं। इन पर उद्घोषणाएँ अंकित थीं और इनका उपयोग सम्राट अशोक द्वारा बुद्ध के संदेश को फैलाने के लिए किया जाता था।
  • इसमें आम तौर पर बैल, शेर, हाथी आदि जानवरों की आकृतियाँ होती हैं।
  • स्तंभों के उदाहरण: सारनाथ, बसरा-बखिरा, रामपुरवा, संकिसा और लौरिया-नंदगढ़
  • अशोक के स्तंभ के सर्वोत्कृष्ट नमूना में सारनाथ के सिहंस्तंभ एकाश्मक स्तंभों का शीर्षक है।
  • यक्ष और यक्षिणी के स्मारक मूर्तिया भारत के विभिन्न हिस्सों में पाए गए हैं और इस प्रकार यक्ष पूजा की लोकप्रियता को दर्शाता है।

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रॉक-कट वास्तुकला/ एकाश्मक वास्तुकला

  • ओडिशा के धौली में एकाश्मक हाथी – रैखिक लय के साथ गोल में मॉडलिंग दिखाता है। इसका एक अशोकन संपादन भी है।
  • लोमस ऋषि गुफा :- गया के पास बाराबर हिल्स में एक रॉक-कट गुफा है। – गुफा के प्रवेश द्वार को अर्धवृत्त चैत्य मेहराब से सजाया गया है। एक हाथी को चैत्य पर उकेरा गया है। गुफा का आंतरिक हॉल आयताकार है; इसके पीछे एक गोलाकार कक्ष भी है। अशोक ने अजीविका संप्रदाय के लिए इस गुफा का निर्माण किया था।
  • अशोक के पुत्र दशरथ ने नागार्जुनी पहाड़ियों में आजाविकों को 3 गुफाएँ प्रदान कीं। इनमें से एक प्रसिद्ध गुफा गोपी गुफा है। इनका विन्यास सुरंग जैसा है। इसके मध्य में ढोलाकार छत और दोनों शिरों पर दो गोल मंडप हैं, जिनमें से एक को गर्भगृह और दूसरे को मुखमंडप समझना चाहिए। इसमें अशोककालीन गृहशिल्प की पूर्णतः रक्षा हुई है।

बिरसा मुंडा ( Birsa Munda)की 145 वी जयंती

स्तूप, चैत्य और विहार

  • Mauryan Empire में स्तूप और विहार का निर्माण बौद्ध और जैन मठ परंपरा के द्वारा किया गया था, लेकिन अधिकांश निर्माण बौद्ध धर्म के हैं।
  • यहां की मूर्तियों में कुछ ब्राह्मणवादी देवताओं का भी अंश मिलता है।
  • राजगृह, कपिलवस्तु, वैशाली, रामाग्राम, अल्लाकप्पा, पावा, वेथादीपा, पिप्पलवीना और कुशीनगर में बुद्ध के अवशेषों पर स्तूपों का निर्माण किया गया था।
  • स्तूप का निर्माण बुद्ध की समाधियों के रूप में किया गया था
  • यह स्तूप दूर से देखने पर एक अण्डाकार आकृति या अर्धगोलाकार आकृति में दिखते हैं और इन्हें कई चरणों में बाँटा जाता है जिनके अलग-2 नाम होते हैं।
    1. मुख्य भाग जिसके नीचे अवशेषों को दबाया गया है उसे अण्ड कहते हैं यह अण्डे की आकृति का एक Solid Structure होता है।
    2. अण्ड के ठीक ऊपर एक चौकोर संरचना बनाई जाती है जिसे हर्मिका कहा जाता है।
    3. हर्मिका के ऊपर यष्ठी का निर्माण किया जाता है और यह मान्यता है कि यष्ठी में भगवान बुद्ध विराजमान होते हैं जिनके ऊपर छत्र का निर्माण किया जाता है।
Mauryan : Art And Architecture
  • बाह्य दुनिया से अलग करने के लिये स्तूप को एक boundary wall के द्वारा बंद कर दिया जाता है जिसे वेदिका कहा जाता है। जिसमें प्रवेश के लिये कुछ दरवाजे भी बनाये जाते हैं। इन दरवाजों को तोरण द्वार कहा जाता है।
  • अगर सांची के स्तूप को देखें तो इसके तोरण द्वारों में सुन्दर नक्काशी का प्रयोग भी किया गया है।
  • सांची को UNESO ने 1989 में World Heritage Site में भी शामिल किया है।
  • वैसे तो सांची में कई सारे स्तूप है पर उनमें सबसे प्रमुख है ग्रेट स्तूप जो कि सबसे प्राचीन माना जाता है।
  • साँची का स्तूप जो कि पूरी तरह से क्षतिग्रस्त हो चुका था उसको अंग्रेजी शासनकाल में Archaeological Survey of India की मदद से फिर से सुधारा गया, और आज यह पर्यटन का एक प्रमुख केन्द्र है।
  • बौद्ध धर्म आज दुनिया में सबसे तेजी से बढ़ने वाले धर्मों में से एक है ऐसे में इन स्तूपों की महत्वता अपने आप बढ़ जाती है।
  • Mauryan काल में चैत्य मूल रूप से प्रार्थना गृह थे और उनमें से अधिकांश स्तूप के साथ थे। आम तौर पर, हॉल आयताकार होता था और इसमें एक अर्ध-गोलाकार रियर छोर होता था। उनके पास घोड़े की नाल के आकार की खिड़कियां थीं। उनके पास दो खंभों से हॉल को अलग करने वाले खंभे भी थे।
  • विहार भिक्षुओं के निवास स्थान थे।
  • दोनों चैत्य और विहार लकड़ी से बनाए गए थे, और बाद में पत्थर को काट कर भी बनाए गए थे।

Hampi Stone Chariot / हम्पी स्टोन रथ

बुद्ध

  • प्रारंभिक काल में, बुद्ध को- पैरों के निशान, कमल के सिंहासन, चक्र, स्तूप आदि जैसे प्रतीकों के माध्यम से दर्शाया जाता है।
  • बाद में, स्तूपों की रेलिंग और टौरों पर कहानियों को चित्रित किया गया। ये मुख्य रूप से जातक कथाएँ थीं।
  • बुद्ध के जीवन की प्रमुख घटनाएँ जो कलाओं में वर्णित हैं, वे हैं जन्म, त्याग, ज्ञान, प्रथम उपदेश (धर्मचक्रप्रवर्तन) और महापरिनिर्वाण (मृत्यु)
  • बार-बार चित्रण करने वाली जातक कहानियाँ:- छंदांत जातक, सिबी जातक, रुरु जातक, वेसंतरा जातक, विदुर जातक और शामा जातक हैं।

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