NCERT Notes: राजपूत [मध्यकालीन भारतीय इतिहास]

मध्यकालीन भारतीय इतिहास UPSC IAS परीक्षा का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है। इस लेख में, हम Civil Service Exam 2021 की तैयारी के लिए मध्यकालीन भारतीय के महत्वपूर्ण योद्धा Rajputs और उत्तरी राज्यों पर NCERT संबंधी टॉपिक को देखेंगे।

The North Indian Kingdoms - The Rajputs
The North Indian Kingdoms – The Rajputs

उत्तर भारतीय राज्य – The Rajputs

प्राचीन भारतीय इतिहास के हर्ष और पुलकेशिन II के शासन के अंत से ही मध्यकालीन भारतीय इतिहास की शुरुआत होती है, यह कालावधि लगभग 8 वीं और 18 वीं शताब्दी के बीच मानते है।

मध्यकाल को दो चरणों में विभाजित किया जा सकता है:

प्रारंभिक मध्यकाल: 8 वीं – 12 वीं शताब्दी
बाद की मध्यकालीन अवधि: 12 वीं -18 वीं शताब्दी

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राजपूतों के बारे में

  • वे भगवान राम , भगवान कृष्ण या वीरों की संतान माने जाते हैं जो बलिदान की आग से पैदा हुए है।
  • Rajputs इतिहास प्रारंभिक मध्यकाल से देखा जाता है।
  • हर्ष की मृत्यु से लेकर 12 वीं शताब्दी तक, भारत का भाग्य ज्यादातर Rajputs राजवंशों के हाथों में था।
  • वे प्राचीन क्षत्रिय परिवारों से संबंधित हैं।
लगभग 36 राजपूत वंश थे। प्रमुख वंश :-
  1. बंगाल के पाल
  2. दिल्ली और अजमेर के चौहान
  3. कन्नौज के राठौर
  4. मेवाड़ के गुहिल या सिसोदिया
  5. बुंदेलखंड के चंदेल
  6. मालवा के परमार
  7. बंगाल के सेना
  8. गुजरात के सोलंकी

पाल वंश

गोपाल (इ.सा. 765-769)

  • पाल राजवंश के संस्थापक
  • उत्तरी और पूर्वी भारत पर शासन किया।
  • उसने पाल वंश का विस्तार किया और मगध पर अपनी शक्ति का विस्तार किया।

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धर्मपाल (इ.सा. 769-815 )

  • वह गोपाल का पुत्र है और अपने पिता का उत्तराधिकारी थे।
  • इन्होंने बंगाल, बिहार और कन्नौज को अपने नियंत्रण में ले लिया था।
  • उन्होंने प्रतिहारों को पराजित किया और उत्तरी भारत के स्वामी बने।
  • वह एक दृढ़ बौद्ध थे और प्रसिद्ध विक्रमशिला विश्वविद्यालय और कई मठों की स्थापना भी की।
  • उन्होंने नालंदा विश्वविद्यालय को भी पुनःस्थापित किया।

देवपाल (इ.सा. 815-855)

  • देवपाल धर्मपाल के पुत्र थे जो अपने पिता के पत्श्चात पाल वंश के उत्तराधिकारी बने ।
  • उसने पाल प्रदेशों को अक्षुण्ण रखा।
  • और साथ ही असम और उड़ीसा पर कब्जा भी कर लिया।

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महीपाल (इ.सा. 998-1038)

  • उनके शासनकाल में पाल वंश शक्तिशाली हो गया।
  • लेकिन महीपाल की मृत्यु के बाद पाल वंश का पतन भी शुरू हो गया हुआ।

गोविंद पाल

यह अंतिम पाल राजा था। उसका वंश संदिग्ध है क्योंकि शासक मदनपाल को पाल वंश का 18 वां और अंतिम शासक कहा गया था, लेकिन कई जगह गोविंदपाल को ही अंतिम शासक कहा जाता है ।

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कन्नौज के लिए त्रिपक्षीय संघर्ष

  • कन्नौज के लिए त्रिपक्षीय संघर्ष मध्य भारत के प्रतिहारों, बंगाल के पालों और दक्कन के राष्ट्रकूटों के बीच था क्योंकि ये तीनों राजवंश कन्नौज पर और गंगा घाटीके उपजाऊ मैदान पर अपना वर्चस्व स्थापित करना चाहते थे।
  • त्रिपक्षीय संघर्ष 200 वर्षों तक चला जिसने इन सभी बड़े Rajputs राज्यों को कमजोर कर दिया जिससे तुर्कों ने इन्हें आसानी से उखाड़ फेंका।

दिल्ली के तोमर

  • तोमर प्रतिहारों के सामंत थे।
  • उन्होंने इ.सा. 736 में दिल्ली शहर की स्थापना की।
  • महीपाल तोमर ने इ.सा. 1043 में थानेश्वर, हांसी और नगरकोट पर कब्जा कर लिया
  • चौहानों ने 12 वीं शताब्दी के मध्य में दिल्ली पर कब्जा कर लिया और तोमर उनके सामंत बन गए

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दिल्ली और अजमेर के चौहान

  • चौहानों ने अजमेर में 1101 शताब्दी में अपनी स्वतंत्रता की घोषणा की इससे पहले वे प्रतिहारों के सामंत थे।
  • उन्होंने उज्जैन पर मालवा और दिल्ली के परमारों से 12 वीं शताब्दी के आरंभिक काल में छिन लिया।
  • उन्होंने अपनी राजधानी दिल्ली स्थानांतरित कर दी।
  • पृथ्वीराज चौहान इस वंश का सबसे महत्वपूर्ण शासक था।

राजपूतों की प्रकृति

  • Rajputs स्वभाव से महान और शिष्ट योद्धा थे।
  • वे महिलाओं और कमजोरों की रक्षा करने में विश्वास करते थे।

धर्म

  • राजपूत हिंदू धर्म के कट्टर अनुयायी थे।
  • उन्होंने बौद्ध धर्म और जैन धर्म का संरक्षण भी किया।
  • Rajputs काल में भक्ति पंथ शुरू हुआ।

शासन

  • राजपूत शासन काफ़ी पुरानी प्रथाओं पर चलती थी।
  • प्रत्येक राज्य को बड़ी संख्या में जागीर में विभाजित किया गया था जिसे जागीरदारों द्वारा शासित किया जाता ।

इस काल के प्रमुख साहित्यिक कार्य

  • कल्हण का राजतरंगिन
  • जयदेव की गीता गोविंदम
  • सोमदेव का कथासरित्सागर
  • पृथ्वीराज चौहान के दरबारी कवि चंद बरदाई ने पृथ्वीराज रासो लिखा जिसमें उन्होंने पृथ्वीराज चौहान के सैन्य कारनामों का उल्लेख किया है।
  • भास्कर चारण ने सिद्धान्त शिरोमणि, खगोल विज्ञान पर एक पुस्तक लिखी।

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राजशेखर

  • महेंद्रपाल और महीपाल के दरबारी कवि।
  • उनकी सबसे प्रसिद्ध रचनाएँ करपु रमनजारी, बाला और रामायण थीं।

कला और वास्तुकला

इस अवधि के दौरान

  • भित्ति चित्र और लघु चित्र लोकप्रिय थे।
  • खजुराहो में मंदिर
  • भुवनेश्वर में लिंगराज मंदिर
  • कोणार्क में सूर्य मंदिर
  • माउंट आबू में दिलवाड़ा मंदिर

राजपूत सत्ता का अंत

  • युद्धरत राजकुमारों को नियंत्रण में रखने और विदेशी आक्रमणों के खिलाफ उनकी गतिविधियों का समन्वय करने के लिए Rajputs काल में कोई मजबूत सैन्य शक्ति नहीं थी।

कुछ लोकप्रिय शब्द

  • जौहर (Jauhar): विदेशी विजेताओं के हाथों निर्वासन से बचने के लिए महिलाओं की सामूहिक आत्महत्या।
  • गीता गोविन्दम (Gita Govindam): चरवाहे का गीत
  • राजतरंगिणी (Rajatarangini): राजाओं की नदी
  • कथासरित्सागर (Kathasaritasagara): ‘कथाओं का महासागर’

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