The Union and Its Territory | संघ और उसके राज्य क्षेत्र: भाग I (अनुच्छेद 1- 4)

भारतीय संविधान के भाग I का शीर्षक The Union And Its Territory या संघ और उसके राज्य क्षेत्र है। जिसमें अनुच्छेद 1 से 4 तक शामिल है।

भारत के संविधान में भाग 1 ऐसे कानूनों का ग्रुप है जिसमें हमारे देश को राज्यों का संघ (The Union And Its Territory)के रूप में परिभाषित किया गया है । संविधान के इस भाग में राज्यों की सीमाओं की स्थापना, नामकरण, विलय या परिवर्तन करने के कानून है। भाग 1 के अंतर्गत पश्चिम बंगाल और ओडिशा का नाम बदलना या झारखंड, छत्तीसगढ़ या तेलंगाना जैसे अपेक्षाकृत नए राज्यों का गठन किया गया था।

The Union And Its Territory | संघ और उसके राज्य क्षेत्र: भाग I (अनुच्छेद 1- 4)

The Union And Its Territory
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अनुच्छेद 1 : संघ का नाम और राज्यक्षेत्र

  • (1) भारत, अर्थात्‌ इंडिया, राज्यों का संघ होगा।
  • (2) राज्य और उनके राज्यक्षेत्र वे होंगे जो पहली अनुसूची में विनिर्दिष्ट हैं।
  • (3) भारत के राज्यक्षेत्र में,
    • (क) राज्यों के राज्यक्षेत्र,
    • (ख) पहली अनुसूची में विनिर्दिष्ट संघ राज्यक्षेत्र, और
    • (ग) ऐसे अन्य राज्यक्षेत्र जो भविष्य में अर्जित किए जाएँ या समाविष्ट होंगे।

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अनुच्छेद 2 : नए राज्यों का प्रवेश या स्थापना

संसद, विधि द्वारा, ऐसे निबंधनों और शर्तों पर, जो वह ठीक समझे, संघ में नए राज्यों का प्रवेश या उनकी स्थापना कर सकेगी।

अनुच्छेद 2 (क)

सिक्किम को संघ में शामिल किया गया। —संविधान (36वाँ संशोधन) अधिनियम, 1975 की धारा 5 द्वारा (26-4-1975 से निरसित)।

अनुच्छेद 3 : नए राज्यों का निर्माण और वर्तमान राज्यों के क्षेत्रों, सीमाओं या नामों में परिवर्तन

संसद, विधि द्वारा

(क) किसी राज्य में से उसका राज्यक्षेत्र अलग करके अथवा दो या अधिक राज्यों को या राज्यों के भागों को मिलाकर अथवा किसी राज्यक्षेत्र को किसी राज्य के भाग के साथ मिलाकर नए राज्य का निर्माण कर सकेगी;
(ख) किसी राज्य का क्षेत्र बढ़ा सकेगी;
(ग) किसी राज्य का क्षेत्र घटा सकेगी;
(घ) किसी राज्य की सीमाओं में परिवर्तन कर सकेगी;
(ङ) किसी राज्य के नाम में परिवर्तन कर सकेगी:

बशर्ते कि इस उद्देश्य के लिए कोई भी विधेयक राष्ट्रपति की सिफारिश के बिना संसद के किसी भी सदन में पेश नहीं किया जाएगा और जब तक कि विधेयक में निहित प्रस्ताव किसी राज्य के क्षेत्र, सीमाओं या नाम को प्रभावित करता है, विधेयक को संबंधित राज्य के विधानमंडल के पास अपने विचारों को प्रकट करने के लिए भेजा जाता है. इस मामले में विधानमंडल को अपनी राय सिमित समय सिमा में देनी होगी।
राज्य के विधानमंडल द्वारा दी गयी राय राष्ट्रपति और संसद के लिए बाध्य नहीं है.

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स्पष्टीकरण 1 : इस अनुच्छेद में, खंड (A ) से (E) तक, दिए गए “राज्य” शब्द में केंद्र शासित प्रदेश शामिल है, लेकिन इसके अलावा, “केंद्र शासित प्रदेश” में राज्य शामिल नहीं है।

स्पष्टीकरण 2 : खण्ड (क) द्वारा संसद को प्रदत्त शक्ति में किसी राज्य या संघ राज्य क्षेत्र के किसी भाग को किसी अन्य राज्य के हिस्से से मिलाकर या अलग कर एक नया राज्य या केंद्र शासित प्रदेश बनाने की शक्ति शामिल है।

अनुच्छेद 4 :  पहली अनुसूची और चौथी अनुसूची के संशोधन तथा अनुपूरक, आनुषंगिक और पारिणामिक विषयों का उपबंध करने के लिए अनुच्छेद 2 और अनुच्छेद 3 के अधीन बनाई गई विधियाँ 

The Union And Its Territory

(1) अनुच्छेद 2 या अनुच्छेद 3 में निर्दिष्ट किसी विधि में पहली अनुसूची और चौथी अनुसूची के संशोधन के लिए ऐसे उपबंध अंतर्विष्ट होंगे जो उस विधि के उपबंधों को प्रभावी करने के लिए आवश्यक हों तथा ऐसे अनुपूरक, आनुषंगिक और पारिणामिक उपबंध भी (जिनके अंतर्गत ऐसी विधि से प्रभावित राज्य या राज्यों के संसद में और विधान-मंडल या विधान-मंडलों में प्रतिनिधित्व के बारे में उपबंध हैं) अंतर्विष्ट हो सकेंगे जिन्हें संसद आवश्यक समझे।

(2) उपरोक्त प्रकार की कोई विधि अनुच्छेद 368 के प्रयोजनों के लिए इस संविधान का संशोधन नहीं समझी जाएगी।

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भाग I से संबंधित जानकारी : The Union And Its Territory  (Articles 1- 4)

  • वह अनुच्छेद जिसके तहत सिक्किम को भारतीय संघ का हिस्सा बनाया गया था: अनुच्छेद 2 (a)
  • अनुच्छेद जिसके तहत तेलंगाना को भारतीय संघ का हिस्सा बनाया गया था: अनुच्छेद 3
  • अनुच्छेद 3 के मूल प्रावधान को संविधान (पाँचवाँ संशोधन) अधिनियम, 1955 द्वारा 24 दिसंबर 1955 को संशोधित किया गया था।
  • भाग I के अंतर्गत कोई उल्लेख नहीं है कि भारत एक संघीय राज्य है। यह “राज्यों के संघ” वाक्यांश का उपयोग करता है।
  • अनुच्छेद 1 और 4 से अलग कोई सूचि के अभाव में प्रादेशिक जल और स्थानीय अनन्य आर्थिक क्षेत्र संबंधित राज्यों या केंद्र शासित प्रदेशों का हिस्सा बन जाएंगे
  • संयुक्त राष्ट्र कन्वेंशन के समुद्र कानून द्वारा निर्धारित एक विशेष आर्थिक क्षेत्र (EEZ) एक सीज़ोन है जिस पर एक राज्य को समुद्री संसाधनों की खोज और उपयोग पर विशेष अधिकार है, जिसमें पानी और हवा से ऊर्जा उत्पादन भी शामिल है। यह बेसलाइन से अपने तट से 200 समुद्री मील (370 किमी) तक फैला है।
Terrotorial Waters vs International Waters
Terrotorial Waters vs International Waters The Union And Its Territory
  • प्रादेशिक समुद्र (territorial sea) और अनन्य आर्थिक क्षेत्र (exclusive economic zone) के बीच अंतर यह है कि पहला पानी पर संप्रभुता को स्वीकार करता है, जबकि दूसरा केवल एक “संप्रभु अधिकार” है जो समुद्र की सतह के नीचे तटीय राज्य के अधिकारों को संदर्भित करता है।
  • संविधान (40 वाँ संशोधन) 1976, अधिनियम ने एक नए अनुच्छेद 297 को प्रतिस्थापित किया, ताकि भारत के संघ राज्य क्षेत्र में भूगर्भ जल या महाद्वीपीय शेल्फ या अनन्य आर्थिक क्षेत्र के भीतर समुद्र में अंतर्निहित सभी भूमि, खनिज, और मूल्य की अन्य चीज़ें प्राप्त हों।
  • प्रादेशिक जल, महाद्वीपीय शेल्फ, विशेष आर्थिक क्षेत्र और अन्य समुद्री क्षेत्र अधिनियम, 1976 (The territorial waters, continental shelf, exclusive economic zone and other maritime zones act, 1976 ) भारत सरकार द्वारा इन क्षेत्रों पर अन्य देशों के साथ व्यवहार के लिए संप्रभु अधिकारों को अधिसूचित करने के लिए लागू किया गया था।
  • हालांकि, यह स्पष्ट नहीं है कि राज्यों को प्रादेशिक जल और विशेष आर्थिक क्षेत्र (जो अभी भी राज्यों के अधिकार क्षेत्र में हैं) से निकले खनिजों पर करों या रॉयल्टी को संविधान की सातवीं अनुसूची में राज्य सूची के क्रम संख्या 50 के अनुसार निर्धारित किया गया है या नहीं।
  • किसी राज्य के निर्माण या विनाश के लिए भारतीय संविधान के तहत संबंधित राज्य से अनुमति अनिवार्य नहीं है। लेकिन इस विधेयक को संबंधित राज्य विधायिका को अपने विचार व्यक्त करने के लिए संदर्भित करना होगा।
  • राज्य के निर्माण या राज्य के नामकरण के लिए भारत के राष्ट्रपति की पूर्व सिफारिश आवश्यक है (अनुच्छेद 3)।
  • अनुच्छेद 2 (नए राज्यों) के तहत ऐसा कोई प्रावधान अनिवार्य नहीं है।

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