भारत में मृदा के प्रकार: [UPSC के लिए NCERT Notes]

भारत में, भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद [ Indian Council of Agricultural Research (ICAR)] ने Types of Soil को 8 श्रेणियों में वर्गीकृत किया है। जलोढ़ मृदा, काली कपास मिट्टी, लाल मृदा, लेटराइट मृदा, पहाड़ी या वन मृदा, शुष्क या रेगिस्तानी मृदा, लवणीय और क्षारीय मृदा, पीट, और मार्शी मृदा भारतीय मृदा की श्रेणियां हैं।

मृदा का पहला वैज्ञानिक वर्गीकरण वासिली दोकुचेव (Vasily Dokuchaev) द्वारा किया गया था।

Types of Soil in India
Types of Soil in India

यह विषय IAS परीक्षा के लिए महत्वपूर्ण है :- भूगोल विषय जो Mains GS-1 के अंतर्गत आता है। इसलिए, यह लेख आपको भारत में विभिन्न प्रकार की मृदा( Types of Soil in India) और उनकी विशेषताओं के बारे में जानकारी देगा।

Different Types of Soil in India

जैसा कि हमने पहले उल्लेख किया गया है, Indian Council of Agricultural Research (ICAR) द्वारा वर्गीकृत मृदा के आठ प्रकार हैं, लेकिन कुछ भारतीय मृदा जैसे – करेवा मृदा, उप पर्वतीय मृदा, हिम क्षेत्र की मृदा, ग्रे या ब्राउन मृदा सभी मुख्य भारतीय मृदा के उप-प्रकार हैं।

Different Types of Soil in India
Different Types of Soil in India

आइए एक-एक करके उनके बारे में पढ़ते है:

Types of Soil in India – Alluvial soil (जलोढ़ मृदा)

जलोढ़,  उस मृदा को कहा जाता है, जो बहते हुए जल द्वारा बहाकर लाया तथा कहीं अन्यत्र जमा किया गया हो। यह भुरभुरा अथवा ढीला होता है अर्थात् इसके कण आपस में सख्ती से बंधकर कोई ‘ठोस’ शैल नहीं बनाते। जलोढ़ मिट्टी प्रायः विभिन्न प्रकार के पदार्थों से मिलकर बनी होती है जिसमें गाद (सिल्ट) तथा मृत्तिका के महीन कण तथा बालू तथा बजरी के अपेक्षाकृत बड़े कण भी होते हैं।

  •  यह अत्यंत ऊपजाऊ है इसे जलोढ़ या कछारीय मिट्टी भी कहा जाता है यह भारत के 43% भाग में पाई जाती है|
  • यह मिट्टी सतलज, गंगा, यमुना, घाघरा,गंडक, ब्रह्मपुत्र और इनकी सहायक नदियों द्वारा लाई जाती है|
  • इस मिट्टी में कंकड़ नही पाए जाते हैं।
  • इस मिट्टी में नाइट्रोजन, फास्फोरस और वनस्पति अंशों की कमी पाई जाती है|
  • खादर में ये तत्व भांभर की तुलना में अधिक मात्रा में विद्यमान हैं, इसलिए खादर अधिक उपजाऊ है।
  • भांभर में कम वर्षा के क्षेत्रों में, कहीं कहीं खारी मिट्टी ऊसर अथवा बंजर होती है।
  • भांभर और तराई क्षेत्रों में पुरातन जलोढ़, डेल्टाई भागों नवीनतम जलोढ़, मध्य घाटी में नवीन जलोढ़ मिट्टी पाई जाती है।
  • पुरातन जलोढ़ मिट्टी के क्षेत्र को भांभर और नवीन जलोढ़ मिट्टी के क्षेत्र को खादर कहा जाता है।

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Types of Soil in India – Red Soil (लाल मृदा)

  • लाल मिट्टी (Red soil) लाल, पीली एवं चाकलेटी रंग की होती है।
  • शुष्क जलवायु में प्राचीन रवेदार और परिवर्तित चट्टानों की टूट-फूट से लाल मृदा का निर्माण होता है और यह मिट्टी पानी के संपर्क में आने से हल्की-हल्की पीली दिखती है।
  • इस मिट्टी में लोहा, ऐल्युमिनियम और चूना अधिक होता है।
  • यह मिट्टी अत्यन्त रन्ध्रयुक्त होती है।
  • इस मिट्टी में बाजरा की फसल अच्छी पैदा होती है, किन्तु गहरे लाल रंग की मिट्टी कपास, गेहूँ, दाल, मोटे अनाज, के लिए उपयुक्त है।
  • भारत में यह मिट्टी उत्तर प्रदेश के बुन्देलखण्ड से लेकर दक्षिण के प्रायद्वीप तक पायी जाती है।
  • यह मध्यप्रदेश, छत्तीसगढ़, झारखण्ड, पश्चिमी बंगाल, मेघालय, नागालैण्ड, उत्तर प्रदेश, राजस्थान, तमिलनाडु तथा महाराष्ट्र में मिलती है।
  • छत्तीसगढ़ में लाल-पीली मिट्टी को स्थानीय रूप से “मटासी मिट्टी” के नाम से जाना जाता है।

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Types of Soil in India – Black or Regur Soil (काली या रेगुर मृदा)

  • काली मिट्टी को लावा मिट्टी भी कहते हैं क्योंकि यह दक्कन ट्रैप के लावा चट्टानों की अपक्षय अर्थात टूटने फूटने से निर्मित हुई मिट्टी है।
  • दक्कन पठार के अलावा काली मिट्टी मालवा पठार की भी विशेषता है अर्थात मालवा पठार पर भी काली मिट्टी पाई जाती है।
  • काली मिट्टी का सर्वाधिक विस्तार महाराष्ट्र राज्य में है।
  • काली मिट्टी की प्रमुख विशेषता यह है कि उसमें जल धारण करने की सर्वाधिक क्षमता होती है काली मिट्टी बहुत जल्दी चिपचिपी हो जाती है तथा सूखने पर इस में दरारें पड़ जाती हैं इसी गुण के कारण काली मिट्टी को स्वत जुताई वाली मिट्टी कहा जाता है।
  • इसमे नाइट्रोजन,पोटास,ह्यूमस की कमी होती है। लेकिन प्राया: इसे काली कपास मिट्टी कह्ते हैं, क्योंकि इसमे कपास की खेती ज्यादा होती है।
  • इस मिट्टी में मैग्नेशियम,चूना,लौह तत्व तथा कार्बनिक पदार्थों की अधिकता होती है।
  • इस मिट्टी का काला रंग टिटेनीफेरस मैग्नेटाइड एंव जीवांश(Humus) की उपस्थिति के कारण होता है।

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Types of Soil in India – Desert Soil (शुष्क या रेगिस्तानी मृदा)

  • शुष्क मृदा (Aridisols) या मरुमृदा (desert soils) शुष्क तथा अर्धशुष्क जलवायु वाले क्षेत्रिं में बनती है।
  • इस प्रकार की मिट्टी रेगिस्तानों क्षेत्रों में प्रमुखतया पायी जाती है।
  • धरती के भूमि क्षेत्र का लगभग एक-तिहाई भाग इसी प्रकार की भूमि से बना है।
  • मरु मृदा में जैव पदार्थों मात्रा बहुत ही कम होती है।
  • जल की कमी इस प्रकार की भूमि का मुख्य विशेषता है।

Types of Soil in India – Laterite Soil (लेटराइट मृदा)

  • लैटेराइट मृदा (Laterite soil) या ‘लैटेराइट मिट्टी'(Laterite) का निर्माण ऐसे भागों में हुआ है, जहाँ शुष्क व तर मौसम बार-बारी से होता है।
  • यह लेटेराइट चट्टानों की टूट-फूट से बनती है।
  • यह मिट्टी चौरस उच्च भूमियों पर मिलती है।
  • इस मिट्टी में लोहा, ऐल्युमिनियम और चूना अधिक होता है। गहरी लेटेराइट मिट्टी में लोहा ऑक्साइड और पोटाश की मात्रा अधिक होती है।
  • लौह आक्साइड की उपस्थिति के कारण प्रायः सभी लैटराइट मृदाएँ जंग के रंग की या लालापन लिए हुए होती हैं।
  • दक्षिण भारत, मध्य प्रदेश और बिहार के पठारों के उच्च स्थलों पर लैटेराइट के निक्षेप पाए गए हैं।
  • ऐसे पठारों की ऊँचाई २,००० से ५,००० फुट, या इससे अधिक है। यहाँ जो निक्षेप बहुत विस्तृत हैं।
  • भारत के लैटेराइट को उच्चस्तरीय या निम्नस्तरीय लैटेराइट में बाँटा गया है।

Types of Soil in India – Mountain Soil (पर्वतीय मिट्टी)

  • पर्वतीय मिट्टी में कंकड़ एवं पत्थर की मात्रा अधिक होती है।
  • पर्वतीय मिट्टी में भी पोटाश, फास्फोरस एवं चूने की कमी होती है।
  • पहाड़ी क्षेत्र में खास करके बागबानी कृषि होती है।
  • पहाड़ी क्षेत्र में ही झूम खेती होती है।
  • झूम खेती सबसे ज्यादा नागालैंड में की जाती है।
  • पर्वतीय क्षेत्र में सबसे ज्यादा गरम मसाले की खेती की जाती है।

Types of Soil in India – लवणीय मिट्टी या क्षारीय मिट्टी

  • लवणीय मिट्टी को क्षारीय मिट्टी, रेह मिट्टी, उसर मिट्टी एवं कल्लर मिट्टी के नाम से जाना जाता है।
  • क्षारीय मिट्टी वैसे क्षेत्र में पाये जाते हैं, जहाँ पर जल की निकास की सुविधा नहीं होती है।
  • वैसे क्षेत्र की मिट्टी में सोडियम, कैल्सियम एवं मैग्नीशियम की मात्रा बढ़ जाती है, जिससे वह मिट्टी क्षारीय हो जाती है। क्षारीय मिट्टी का निर्माण समुद्रतटीय मैदान में अधिक होती है।
  • इसमें नाइट्रोजन की मात्रा कम होती है।
  • भारत में क्षारीय मिट्टी पंजाब, हरियाणा, पश्चिमी राजस्थान एवं केरल के तटवर्ती क्षेत्र में पाये जाते हैं।
  • क्षारीय मिट्टी में नारियल की अच्छी खेती होती है।

Reference: भारतीय मृदा एवं भू-उपयोग सर्वेक्षण

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